इस बीच निगम कर्मियों ने बैठक का बायकाट किया है। उनकी बहस भाजपा की पार्षद भवनीत कौर के साथ हुई। पार्षद ने सेंट्रल इंस्पेक्टर निशु घई का नाम लेकर आरोप लगाया कि वह उनके इलाके में कभी फिजिकल तौर पर ड्यूटी पर नहीं रहे।
उधर निशु घई का कहना है कि पार्षद ने उनसे बदतमीजी से बात मीटिंग में की है। उन्हें तुम कह कर बुलाया गया है जिस कारण वह मीटिंग का बायकाट करते हैं।

लुधियाना नगर निगम में हंगामे के दौरान पुलिस ने बीजेपी पार्षद गौरवजीत गोरा को उठाया।

शनिवार को वार्ड नंबर-47 से आम आदमी पार्टी की पार्षद उषा कल्याण के निधन के कारण बैठक स्थगित कर दी गई थी। वह कैंसर से पीड़ित थीं और एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनके बेटे की शादी में करीब एक महीना बाकी था।
शनिवार को बैठक के लिए गुरु नानक देव भवन में पार्षद जुटे थे। बैठक शुरू होने से पहले ही कांग्रेस पार्षदों ने शहर की सड़कों की मैकेनिकल स्वीपिंग के लिए प्रस्तावित 82 करोड़ रुपए के टेंडर के खिलाफ प्रदर्शन किया था।

नकली नोटों से भरी बोरी लेकर पहुंचे थे कांग्रेसी
कांग्रेस पार्षद और फाइनेंस एंड कॉन्ट्रैक्ट्स कमेटी के सदस्य गौरव भट्टी नकली नोटों से भरी बोरी लेकर पहुंचे थे। उन्होंने मेयर इंद्रजीत कौर को ये नोट देते हुए टेंडर रद्द करने की मांग की थी। पुलिस ने उन्हें बैठक हॉल के प्रवेश द्वार पर रोकने की कोशिश की, लेकिन वह बोरी लेकर अंदर पहुंच गए। उनका कहना था कि शहर के लिए व्यावहारिक नहीं होने वाले इस टेंडर के जरिए जनता के पैसे से खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए।

1208 सफाई कर्मचारियों की सेवा बढ़ाने पर भी विरोध
महिला पार्षद भूपिंदर कौर ने नगर निगम के 1208 सफाई कर्मचारियों की सेवा एक साल बढ़ाने के प्रस्ताव के खिलाफ प्रदर्शन किया था। वह पिछले एक साल से अधिकारियों को पत्र लिखकर इन कर्मचारियों का पूरा रिकॉर्ड मांग रही हैं, जिनमें से कई कर्मचारी मौके पर काम करते हुए दिखाई नहीं देते। उन्होंने बैठक हॉल के बाहर व्हीलचेयर पर बैठकर हाथों में तख्तियां लेकर विरोध जताया।
भूपिंदर कौर ने कहा कि उन्होंने इस मामले में कई नेताओं और अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। उन्होंने चेतावनी दी कि वह बैठक में शामिल नहीं होंगी और यदि सोमवार को हाउस में यह प्रस्ताव पास किया गया, तो पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी।
मेयर ने पार्षद के निधन के बाद बैठक टाली
शनिवार को पार्षदों के बैठक हॉल में बैठने के बाद मेयर इंद्रजीत कौर और नगर निगम कमिश्नर पहुंचे थे। सीनियर डिप्टी मेयर राकेश प्रशार और पार्षद तनवीर धालीवाल ने मेयर से मुलाकात कर पार्षद उषा कल्याण के निधन के चलते बैठक एक दिन के लिए स्थगित करने की मांग की। मेयर ने कमिश्नर और अन्य पार्षदों से चर्चा के बाद बैठक सोमवार तक स्थगित करने की घोषणा की थी।

AAP पार्षद के पति ने भी टेंडर का विरोध किया
वार्ड नंबर 53 से आम आदमी पार्टी की पार्षद महक टीना के पति गुरकरण टीना ने कहा कि नगर निगम हाउस की बैठक में आज करीब 82.5 करोड़ रुपए के टेंडर का वर्क ऑर्डर पास करने की तैयारी है। दिल्ली की एक कंपनी को शहर की सड़कों की हाईप्रेशर पानी से सफाई करने का ठेका दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इसके लिए 2,500 रुपए प्रति किलोमीटर की दर तय की गई है। यह दर बाइपास के एक हिस्से के लिए बताई जा रही है। सिंगल सड़क के लिए 5,000 रुपए प्रति किलोमीटर और फोरलेन सड़क के लिए 10,000 रुपए प्रति किलोमीटर तक खर्च आएगा। उनके मुताबिक ये दरें काफी ज्यादा हैं।
संस्थान की रिपोर्ट नकारात्मक थी
गुरकरण टीना ने कहा कि जब कंपनी ने टेंडर के लिए आवेदन किया था, तब नगर निगम ने थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी को पत्र लिखकर पूछा था कि क्या इस तरह पानी से सड़कों की सफाई करना उचित है। उन्होंने दावा किया कि संस्थान की रिपोर्ट नकारात्मक थी।
कमाई को बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा
रिपोर्ट में पानी और सड़क पर बिछाई जाने वाली लुक को एक-दूसरे के विपरीत बताया गया था। पानी के संपर्क में आने से सड़कों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई थी। यदि आज हाउस की बैठक में वर्क ऑर्डर पास किया जाता है, तो इसका विरोध किया जाएगा। जनता की मेहनत की कमाई को इस तरह बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा।
पूर्व पार्षद ममता आशु ने भी उठाए सवाल
पूर्व पार्षद ममता आशु ने भी सड़कों की धुलाई के लिए निजी कंपनी को ठेका देने के प्रस्ताव पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि सड़कों की रोजाना धुलाई से पानी की बर्बादी होगी, जबकि भूजल स्तर पहले ही गिर रहा है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि एजेंडे में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि सड़कों की धुलाई के लिए किस तरह के पानी का इस्तेमाल होगा।
ममता आशु ने कहा कि नगर निगम को टेंडर पर आगे बढ़ने से पहले दूसरी नगर निगमों में मैकेनिकल स्वीपिंग के लिए अपनाई जा रही दरों की तुलना सार्वजनिक करनी चाहिए। इससे पता चल सकेगा कि प्रस्तावित खर्च कितना उचित है।









