मुलाजिम नेता 2026 में 6 धरने दे चुके हैं लेकिन अपनी मांगें मनवाने में यूनियन फेल रही है। कई बार यूनियन बड़े ऐलान कर सरकार से बात पर अगले महीने के लिए धरना टाल देती है जिससे मुफ्त यात्रा करने वाली महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक मांगों को लेकर सरकार द्वारा लिखित में आदेश जारी नहीं किए जाते, तब तक उनका यह धरना और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने अपनी 3 मांगें उठाई हैं।
पहली मांग है कि कॉन्ट्रैक्ट पर तैनात कर्मचारियों को सर्विस रूल्स के तहत जल्द से जल्द पक्का किया जाए। दूसरी मांग के तहत आउटसोर्सिंग पर काम कर रहे कर्मचारियों को कॉन्ट्रैक्ट पर लाया जाए। वहीं तीसरी प्रमुख मांग यह है कि पिछले दिनों प्रदर्शनों के दौरान कर्मचारियों पर दर्ज किए गए पुलिस मामलों (पर्चों) को तुरंत रद्द कर उन्हें बाइज्जत बरी किया जाए।


पिछली बैठक रद्द होने से फूटा गुस्सा, जुबानी आश्वासन से इंकार
कर्मचारी नेताओं के अनुसार, सरकार ने पहले 15 तारीख को एक पैनल मीटिंग का लिखित समय दिया था और आश्वासन दिया था कि इस बैठक में कोई ठोस नतीजा निकाला जाएगा। हालांकि, उस लिखित बैठक को रद्द कर दिया गया और बिना किसी लिखित पत्र के केवल जुबानी तौर पर 21 तारीख की बैठक तय कर दी गई।
सरकार के इस रवैये से नाराज होकर कर्मचारियों ने विरोध स्वरूप धरना देने का फैसला किया। हालांकि, चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री और उच्च प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कर्मचारी प्रतिनिधियों की वार्ता जारी है, लेकिन कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि वे केवल लिखित समझौते के बाद ही धरना समाप्त करेंगे।
बदलाव लाने के लिए प्रचार किया, अब ठगा महसूस कर रहे हैं
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने आम आदमी पार्टी सरकार पर वादाखिलाफी का गंभीर आरोप लगाया। कर्मचारियों ने कहा कि चुनाव के समय उन्होंने बसों में सफर करने वाले 700 से 800 यात्रियों को समझाकर इस सरकार को सत्ता में लाने के लिए काफी प्रचार किया था।
कर्मचारियों का कहना है कि सरकार ने “पंजाब के कमाऊ पूत” (कर्मचारियों) को धरने पर न बैठने देने का वादा किया था, लेकिन आज सबसे ज्यादा वही खज्जल-ख्वार (परेशान) हो रहे हैं। कर्मचारियों ने कहा कि जगह-जगह ‘ईमानदार सीएम’ के बोर्ड लगाने की जरूरत नहीं होती, जनता काम देखकर पहचानती है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें न मानी गईं तो वे सरकार के खिलाफ खुलकर प्रचार करेंगे।









